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दासोsहं कोसलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मणः। हनूमान् शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मजः।।

    
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Sanskrit Divas

संस्‍कृत दिवस, दि. ०२ अगस्त, २०१२

ब्रह्मचारी डा. सुरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में ५ बजे से आचार्य राजनाथ झा के द्वारा प्रस्तुत वैदिक मंगलाचरण से आरम्भ हुआ।

कार्यक्रम का संचालन महावीर मन्दिर के प्रकाशन एवं शोध पदाधिकारी प. भवनाथ झा ने किया।

प. भवनाथ झा ने महाकवि की कृति बुद्धचरितम्‌ के अनुपलब्ध अश का स्वरचित काव्यानुवाद से अंश प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि ईसा की पहली शती में महाकवि अश्वघोष ने भगवान्‌ बुद्ध का चरित संस्कृत में २८ सर्गों में लिखा था जिनमें से मूल अंश केवल १४ सर्गों तक ही उपलब्ध है। शेष अंश चीनी तिब्बती एवं उनके अंगरेजी अनुवाद के रूप में उपलब्ध है। प. भवनाथ झा ने उन अनुवादों के आधार पर मूल संस्कृत में उस काव्य को पूर्ण किया है।

कार्यक्रम में डा. रामविलास चौधरी द्वारा लिखित संस्कृत अद्‌भुतपाणिग्रहणम्‌ का लोकार्पण किया गया। इस नाटक के माध्यम से डा. चौधरीजी ने जातिप्रथा, देह-प्रथा आदि सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया है।

संस्कृत दिवस समारोह के इस काेर्यक्रम में डा. शिववंश पाण्डेय, डा. मुकेश ओझा प. रामनारायण सिंह प. मार्कण्डेय शारदेय डा. मिथिलेश कुमारी मिश्रा आदि ने संस्कृत के सम्बन्ध में अपने विचार प्रस्तुत किये।