Mahavir Mandir
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दासोsहं कोसलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मणः। हनूमान् शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मजः।।

    
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  • विराट् रामायण मन्दिर

    You can donate for Viraat Ramayn M

              महावीर मन्दिर के तत्त्वावधान में निर्माणाधीन विराट् रामायण मन्दिर संसार का सबसे बड़ा मन्दिर होगा। इसकी लम्बाई 2800 फीट, चैड़ाई 1400 फीट तथा ऊँचाई 405 फीट है। इसमें 18 मन्दिर और 18 गगनचुम्बी शिखर होंगे। इसमें संसार का सबसे विशाल शिवलिंग भी स्थापित करने की योजना है। कम्बोडिया में स्थित अंकोरवाट मन्दिर संसार में हिन्दुओं का सबसे बड़ा मन्दिर है। इसके शिखर की ऊँचाई करीब 200 फीट है। विराट् रामायण मन्दिर का शिखर इससे करीब दुगुना ऊँचा है।

    इस मन्दिर की भव्यता ऐसी होगी कि 72 फीट की ऊँचाई पर मुख्य मन्दिर में भगवान् श्रीराम, जगज्जननी सीता, उनके आत्मज लव-कुश, अप्रतिम बलवान् हनुमानजी तथा महर्षि वाल्मीकि की मूर्तियाँ लगेंगी और करीब 25 हजार भक्त उतनी ऊँचाई पर एक साथ बैठकर इनकी पूजा कर सकेंगे हैं तथा तीन हजार फीट की दूरी पर स्थित भगवान् श्रीराम के मुखारविन्द का दर्शन भक्त सिंहद्वार से ही कर सकेंगे। इस मन्दिर में समग्र रामायण-कथा एलेक्ट्रोनिक उपकरणों द्वारा दिखलाया जायेगा और ये सब एकदम जीवन्त दीखेंगे। परिसर में समुद्र-मन्थन और रामसेतु के दृश्य भी होंगे।

    मन्दिर निर्माण में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता सुनिश्चित करने के लिए महावीर मन्दिर ने इलाहाबाद बैंक के सहयोग से सहयोग राशि के कूपन छपवाये हैं। ये सारे कूपन इलाहाबाद बैंक के द्वारा अपने सिक्यूरिटी प्रेस में छपवाये गये हैं। ये उसी कागज पर छपे हैं जिसपर चेक बुक आदि छपते हैं एवं हरेक पन्ने पर वाटर मार्क है। साथ ही इस पर बैंक का हालमार्क भी है, जो केवल अल्ट्रावायलेट किरणों द्वारा ही दिखलायी पड़ेगा। इस प्रकार इन कूपनों की नकल कोई भी नहीं कर पायेगा। ये सारे कूपन सिरियल नम्बर के साथ बैंक में ही रखे रहेंगे। महावीर मन्दिर न्यास भी उन कूपनों को खरीदकर ही भक्तों के बीच निर्दिष्ट मूल्यों पर वितरित करेगा। इस प्रकार इन कूपनों के आदान-प्रदान में पूरी पारदर्शिता बरती गयी है।

    इस मन्दिर के निर्माण में भक्तों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए महावीर मन्दिर न्यास ने भक्तों से 01 वर्गफुट से लेकर 1000 वर्गफुट तक के निर्माण में सहयोग का प्रावधान इस प्रकार किया है:-

    1. इस विराट् रामायण मन्दिर में एक वर्गफुट के निर्माण के सहयोग के लिए 7,707/- (सात हजार सात सौ सात) रुपये की राशि देनी पड़ेगी। भक्तों को महावीर मन्दिर न्यास की ओर से एक बहुत सुन्दर प्रमाण-पत्र दिया जायेगा जिस पर विराट् रामायण मन्दिर का चित्र रहेगा।
    2. जो भक्त 15 वर्गफुट के निर्माण का सहयोग करेंगे उन भक्तों को यह भी सुविधा रहेगी कि वे अपने माता-पिता या किसी अन्य प्रियजन की स्मृति में उस दान को मन्दिर परिसर में स्थित धर्मस्तम्भ पर लिखवा सकेंगे। 15 वर्गफुट के निर्माण में 15 x 7707 = 1,16,605/- (एक लाख सोलह हजार छः सौ पाँच) रुपये देने पडेंगे। यह तीन किस्तों में भी जमा किया जा सकता है, लेकिन धर्म-स्तम्भ पर नाम अंतिम किस्त जमा करने के बाद ही उत्कीर्ण होगा।
    3. जो लोग 100 या 1000 वर्गफुट का निर्माण करेंगे उनको विराट् रामायण मन्दिर में उनकी सहयोग-राषि के अनुरूप प्रमुखता से उनके सहयोग को उत्कीर्ण किया जायेगा।
    4. सहयोग राषि के कूपन महावीर मन्दिर , विराट रामायण मन्दिर निर्माण स्थल या इलाहाबाद बैंक की किसी भी प्रमुख शाखा से खरीदे जा सकते हैं।
    5. जो लोग 7,707/- रुपये की इकाई में सहयोग राशि नहीं देकर 1000, 5000 या 10,000 रुपये या इससे अधिक की राशि देना चाहते है; वे अपनी राशि विराट् रामायण मन्दिर के नाम से इलाहाबाद बैंक, मुख्य शाखा, पटना, खाता संख्या-  50101162885 में जमा कर सकते हैं।

    या निम्नलिखित बैंको की किसी भी शाखा में श्री महावीर स्थान न्यास समिति के नाम से जमा कर सकते है और वह राशि विराट् रामायण मन्दिर के खाते में स्वतः जमा हो जायेगी।

      1. इलाहाबाद बैंक, मुख्य शाखा, पटना, खाता संख्या- 50002488276
      2. भारतीय स्टेट बैंक, मौर्यालोक कम्पलेक्स शाखा, पटना, खाता संख्या -32642875294
      3. भारतीय स्टेट बैंक, एस.पी.बी. शाखा, गाँधी मैदान, पटना, खाता संख्या- 31911260294
      4. सेंट्रल बैंक आफ इण्डिया, बुद्धमार्ग शाखा, पटना, खाता संख्या-1270842463 
    राशि जमा करने की रसीद दिखलाने पर उन्हें भी 7707/- रुपये से अधिक की राशि होने की स्थिति में प्रमाण पत्र दिया जायेगा या 15 वर्गफुट के निर्माण से अधिक की राशि जमा करने पर उनके भी अपने माता-पिता या किसी प्रियजन का नाम धर्म-स्तम्भ पर लिखा जायेगा।

     

    (6) यह मन्दिर धनाढ़्यों एवं कुबेरों के सहयोग से नहीं बन रहा है, बल्कि सामान्य भक्तों के उत्साह एवं सहयोग से बन रहा है। अतः सभी भक्त इसमें उदारतापूर्वक सहयोग करें।

    ( 7) 7,707/- रुपये की राशि इसलिए निर्धारित की गयी है कि वैशाली गणराज्य में 7707 राजा हुआ करते थे और यह स्थान वैशाली के पास स्थित है। जनकपुर में श्रीराम-जानकी विवाह के बाद बारात के लौटने के मार्ग में यह स्थान जनकपुर एवं अयोध्या के बीच में बराबर की दूरी पर पड़ता है; अतः इसका (कथवलिया-बहुआरा ग्राम) नया नामकरण जानकी नगर रखा गया है।

    महावीर मन्दिर न्यास
    पटना

     

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