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मगध की सूर्यपूजा की कथा द्वापर युग के अंत समय से जुड़ी हुई है। भगवान् कृष्ण के पुत्र साम्ब को कुष्ठ रोग हो गया था, जिसे ठीक करने के लिए वसिष्ठ की आज्ञा से शाकद्वीप से सूर्योपासक मग ब्राह्मण लाये गये। घटना का क्रम ऐसा हुआ कि वे लोग मगधContinue Reading

(Title Code- BIHHIN00719), धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना की पत्रिका, मूल्य : पन्द्रह रुपये प्रधान सम्पादक  भवनाथ झा सहायक सम्पादक- श्री सुरेशचन्द्र मिश्र पत्राचार : महावीर मन्दिर, पटना रेलवे जंक्शन के सामने पटना- 800001, बिहार फोन: 0612-2223798 मोबाइल: 9334468400 E-mail: dharmayanhindi@gmail.com Web: www.mahavirmandirpatna.org/dharmayan/ पत्रिका में प्रकाशित विचार लेखक के हैं। इनसेContinue Reading

धर्मायण अंक संख्या 100 का मुखपृष्ठ

“धर्मायण” के 100वें अंक का सम्पादकीय महावीर मन्दिर की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना की मासिक पत्रिका “धर्मायण” का 100वाँ अंक सुधी पाठकों के कर-कमलों में समर्पित करते हुए अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है। अभी तक सुधी पाठक इस पत्रिका में निहित विचारों से लाभान्वित होते रहे हैं।Continue Reading

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धर्मायण अंक संख्या 100 का मुखपृष्ठ

वर्तमान में कोविड-19 के कारण यह पत्रिका केवल ई-पत्रिका के रूप में प्रकाशित हो रही है। अंक संख्या 100, हिन्दी धार्मिक पत्रिका “धर्मायण” महावीर मंदिर की ओर से प्रकाशित धर्मायण पत्रिका का 100वाँ अंक कई अर्थों में विशेष है। इस अंक में सूर्य की उपासना एवं इसकी महत्ता पर विशेषContinue Reading

श्री कमलेश पुण्यार्क

विशुद्ध गृहस्थ आश्रम में रहकर, श्रीयोगेश्वर आश्रम का संचालन करते हुए,“ सर्वेभवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः”का पावन संकल्प लेकर, योग और नाड्योपचारतन्त्र के प्रचार-प्रसार में आपने काफी भ्रमण भी किया है ।Continue Reading

आचार्य सीताराम चतुर्वेदी

आचार्य सीताराम चतुर्वेदी भारतीय गम्भीर अध्येता, निष्ठावान अध्यापक, कुशल प्रशासक, प्रौढ़ समीक्षक, अनेक भाषाओं के विद्वान, श्रेष्ठ नाटककार, अभिनेता, प्रयोक्ता, उच्चकोटि के साहित्यकार, संगीतज्ञ, भाषा, संस्कृति एवं मान्यताओं के प्रबल पक्षधर थे।Continue Reading

श्रीरंजन सूरिदेव

महावीर मन्दिर से प्रकाशित धर्मायण पत्रिका के लिए यह गौरव का विषय है कि श्रीरंजन सूरिदेव जैसे विद्वान् इसके सम्पादक रहे हैं। पत्रिका-परिवार की ओर से उनका नमनContinue Reading

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आज एक सामान्य अवधारणा बन गयी है कि वाल्मीकि-रामायण का मुंबई-संस्करण जो गीता प्रेस से प्रकाशित है, वहीं एक मात्र पाठ है। जबकि सच्चाई है कि गीता प्रेस का पाठ रामायण का केवल दक्षिण-पश्चिम भारत का पाठ है। पूर्वोत्तर तथा पश्चिमोत्तर भारत का पाठ बहुत अंश में भिन्न हैं। पश्चिमोत्तर पाठ का प्रकाशन लाहौर से हुआ था तथा पूर्वोत्तर पाठ का प्रकाशन कलकत्ता से हुआ था। रामायण पर की गयी विवेचना इन पाठों को देखा बिना पूरी नहीं हो सकती, क्योंकि 1000 वर्ष पुरानी पाण्डुलिपि पूर्वोत्तर पाठ की ही मिलती है।Continue Reading

राष्ट्रीय व अर्न्तराष्ट्रीय जर्नलों में गणित तथा तकनीकि विषयों पर १० शोध पत्र ।
राष्ट्रीय पत्रिकाओं में दर्जनों आलेख ।
पूज्य गुरुदेव चित्रकूट पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य कृत निम्नांकित पुस्तकों का सह-सम्पादन/सम्पादन –Continue Reading