ऑनलाइन पूजा / अनुष्ठान / वैदिक अनुष्ठान की सूची
ऑफलाइन पूजा / अनुष्ठान / वैदिक अनुष्ठान की सूची
पूजा-अर्चना (पूजा-पाठ)
रामरक्षास्तोत्र: यह भगवान राम की स्तुति है और इसे पढ़ने से सभी प्रकार के भय, दुःख और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
हनुमत_कवच: यह हनुमान जी की स्तुति है और इसे पढ़ने से बल, बुद्धि, और शक्ति प्राप्त होती है।
आदित्य_हृदय_पाठ: यह सूर्य देव की स्तुति है और इसे पढ़ने से स्वास्थ्य, धन, और सफलता प्राप्त होती है।
रामचरितमानस : खोये हुए व्यक्ति या किसी वस्तु को पुनः पाने के लिए सुन्दरकाण्ड का पाठ होता रहा है। इससे हनुमानजी की आराधना की जाती है।
वाल्मीकि-रामायण : वाल्मीकि रामायण के सुन्दरकाण्ड में ६८ अध्याय हैं। इसके पाठ का कई प्रकार से पुरश्चरण होता है। महावीर मन्दिर में तीन दिन एवं सात दिन के दो प्रकार से पाठ होता है। इसमें हवन नहीं होता है।
सुचना: वैदिक-कर्मकाण्ड : वैदिक कर्मकाण्डों के लिए पहले से शुल्क जमाकर समय एवं दिन निश्चित कर लिया जाता है। इसी शुल्क में पुरोहित की दक्षिणा भी सम्मिलित है। पूजा करानेवाले को अपने साथ कुछ भी लाने की आवश्यकता नहीं है। पूजा के दिन यजमान की सदेह उपस्थिति अनिवार्य है। यदि यजमान स्वयं उपस्थित होने में असमर्थ हैं तो उनके निकटतम रक्त संबंधी (पति, पत्नी, माता, पिता, सोदर भाई, बहन आदि) आकर पूजा संपन्न कर सकते हैं।
जप एवं पाठ (पूजा-पाठ)
सम्पुट पाठ : श्रीदुर्गासप्तशती में सात सौ मन्त्र हैं। इनमें से कुछ मन्त्र सम्पुट पाठ के लिए प्रसिद्ध हैं। विभिन्न कामनाओं की सिद्धि के लिए विभिन्न बीज मन्त्रों का विधान किया गया है। सम्पुट पाठ में १३ अध्याय के सात सौ मन्त्रों में प्रत्येक मन्त्र के आगे-पीछे बीजमन्त्र जोड़कर पाठ किया जाता है। इस प्रकार एक सामान्य पाठ से तीन गुना समय इस सम्पुट पाठ में लगता है। यह पाठ विशेष फलदायी माना गया है। (विशेष अध्ययन)
साधारण पाठ : देवी की उपासना में यह पाठ सबसे प्रसिद्ध है। इस पाठ के अन्तर्गत अर्गला, कील, कवच, शापोद्धार, शतनाम, मूल १३ अध्याय एवं अन्त में ऋग्वेद के देवी-सूक्त का पाठ होता है। इसमें लगभग ढाई घंटा का समय लगता है। (विशेष अध्ययन)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्।
ऊर्व्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्॥
यही मूल मन्त्र है। इस मन्त्र का १ लाख २५ हजार जप करने या कराने का विधान है। महावीर मन्दिर में योग्य साधक एवं पण्डित द्वारा यह जप कराने की व्यवस्था की गयी है। इसमें शुल्क जमा करने पर संकल्प लेने की तिथि निर्धारित की जाती है तथा उस दिन यजमान को स्वयं या अन्य किसी निकटतम व्यक्ति आकर संकल्प करते हैं और उसी दिन से जप आरम्भ हो जाता है। प्रत्येक १०,००० जप सम्पन्न होने पर उसका दशांश, १,००० मन्त्र से हवन होता है। इस हवन में यजमान अथवा किसी प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य है। शुल्क जमा करने की न्यूनतम ईकाई 3630.00 रुपया है जिसमें १०,००० जप एवं १,००० हवन, कुल ११,००० जप-संख्या सम्मिलित है।
सुचना: वैदिक-कर्मकाण्ड : वैदिक कर्मकाण्डों के लिए पहले से शुल्क जमाकर समय एवं दिन निश्चित कर लिया जाता है। इसी शुल्क में पुरोहित की दक्षिणा भी सम्मिलित है। पूजा करानेवाले को अपने साथ कुछ भी लाने की आवश्यकता नहीं है। पूजा के दिन यजमान की सदेह उपस्थिति अनिवार्य है। यदि यजमान स्वयं उपस्थित होने में असमर्थ हैं तो उनके निकटतम रक्त संबंधी (पति, पत्नी, माता, पिता, सोदर भाई, बहन आदि) आकर पूजा संपन्न कर सकते हैं।
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कुण्डली निर्माण / ज्योतिष परामर्श
महावीर मन्दिर में अनुष्ठान की प्रक्रिया
यह एक ऐसा मन्दिर है जहाँ भक्त निश्चित शुल्क के भुगतान पर अनुष्ठान पूरा करने के लिए सभी सामग्री प्राप्त करते हैं और पुरोहितों को 'दक्षिणा' का भुगतान मन्दिर प्रबंधन द्वारा किया जाता है।