विवरण: सम्पुट पाठ : श्रीदुर्गासप्तशती में सात सौ मन्त्र हैं। इनमें से कुछ मन्त्र सम्पुट पाठ के लिए प्रसिद्ध हैं। विभिन्न कामनाओं की सिद्धि के लिए विभिन्न बीज मन्त्रों का विधान किया गया है। सम्पुट पाठ में १३ अध्याय के सात सौ मन्त्रों में प्रत्येक मन्त्र के आगे-पीछे बीजमन्त्र जोड़कर पाठ किया जाता है। इस प्रकार एक सामान्य पाठ से तीन गुना समय इस सम्पुट पाठ में लगता है। यह पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
(विशेष अध्ययन) साधारण पाठ : देवी की उपासना में यह पाठ सबसे प्रसिद्ध है। इस पाठ के अन्तर्गत अर्गला, कील, कवच, शापोद्धार, शतनाम, मूल १३ अध्याय एवं अन्त में ऋग्वेद के देवी-सूक्त का पाठ होता है। इसमें लगभग ढाई घंटा का समय लगता है।
(विशेष अध्ययन)
विवरण: कलश स्थापना, जिसे घटस्थापना भी कहा जाता है, नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नौ दिनों की अवधि के दौरान देवी के नौ रूपों की पूजा करने और उनका आशीर्वाद लेने का एक अनुष्ठान है।
विवरण: मनोकामना यज्ञ, जिसे "कामना पूर्ति यज्ञ" या "इच्छा पूर्ति यज्ञ" भी कहा जाता है, एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें देवी-देवताओं को प्रसन्न करके अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए यज्ञ किया जाता है। यह यज्ञ विशेष रूप से तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति किसी विशेष मनोकामना को पूरा करना चाहता है, जैसे कि स्वास्थ्य, धन, विवाह, या शिक्षा में सफलता।
विवरण: जन्मदिन के अवसर पर आयु-वृद्धि तथा अगले वर्ष में सुख, शान्ति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि के लिए देवताओं की पूजा तथा हवन का विधान शास्त्रों में किया गया है। महावीर मन्दिर की ओर से इसकी व्यवस्था की गयी है। इसे वर्षवृद्धि या वर्द्धापन भी कहा जाता है।
विवरण: पटना के महावीर मंदिर में हनुमान जी के चरणों में श्रद्धा प्रकट करने और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए 'ध्वज संकल्प' (Dhwaja Sankalpa) और 'ध्वज पूजा' की बहुत ही उत्तम और व्यवस्थित व्यवस्था है। सनातन परंपरा में मंदिर के शिखर पर ध्वज लगाना या ध्वज का संकल्प लेना पूरे परिवार की सुख-समृद्धि, आयु-वृद्धि और विजय का प्रतीक माना जाता है। इस पूजा के तहत भक्त भगवान महावीर (हनुमान जी) के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा और समर्पण के प्रतीक के रूप में ध्वज अर्पित करने का संकल्प लेते हैं। मंदिर के पुरोहित आपके नाम और गोत्र का उच्चारण कर वैदिक रीति से संकल्प करवाते हैं।
विवरण: भक्तों की मन्नतें रहती है कि वे मन्दिर में बच्चे का मुण्डन-संस्कार कराये। महावीर मन्दिर में भी निर्धारित शुल्क जमा कर तुलसी-मण्डप के पीछे बच्चे का मुण्डन करा सकते हैं। इसके लिए नाई, पुरोहित आदि की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। बाजा बजाने से अन्य श्रद्धालुओं को असुविधा होती है, अतः इस पर रोक लगा दिया गया है।
विवरण: महावीर मन्दिर की ओर से रामावत संगत की स्थापना की जा रही है। रामावत संगत युग-प्रर्वतक सन्त रामानन्दाचार्य के सिद्धान्तों का अनुसरण सामान्यतः करेगी। रामानन्दाचार्य द्वारा स्थापित सम्प्रदाय का नाम है रामावत सम्प्रदाय और इस समुदाय के भक्त दो प्रकार के हैं- साधु एवं गृहस्थ। साधु बैरागी कहलाते हैं और आज भारत में ऐसे विरक्त सन्तों की संख्या सर्वाधिक होगी। उनके अपने नियम एवं अनुशासन हैं। रामावत संगत उनके प्रति अगाध श्रद्धा रखेगी तथा उनके नियम एवं अनुशासन में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
(विशेष अध्ययन)
विवरण: :
महामृत्युंजय जप : रोग, विघ्न-बाधा, मृत्यु की आशंका आदि के लिए मृत्यु को भी जीतने वाले महामन्त्र का जप प्राचीन काल से होता रहा है। वैदिक महामृत्युंजय मन्त्र इस प्रकार है-
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्।
ऊर्व्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्॥
यही मूल मन्त्र है। इस मन्त्र का १ लाख २५ हजार जप करने या कराने का विधान है। महावीर मन्दिर में योग्य साधक एवं पण्डित द्वारा यह जप कराने की व्यवस्था की गयी है। इसमें शुल्क जमा करने पर संकल्प लेने की तिथि निर्धारित की जाती है तथा उस दिन यजमान को स्वयं या अन्य किसी निकटतम व्यक्ति आकर संकल्प करते हैं और उसी दिन से जप आरम्भ हो जाता है। प्रत्येक १०,००० जप सम्पन्न होने पर उसका दशांश, १,००० मन्त्र से हवन होता है। इस हवन में यजमान अथवा किसी प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य है। शुल्क जमा करने की न्यूनतम ईकाई 3630.00 रुपया है जिसमें १०,००० जप एवं १,००० हवन, कुल ११,००० जप-संख्या सम्मिलित है।
सुचना: वैदिक-कर्मकाण्ड : वैदिक कर्मकाण्डों के लिए पहले से शुल्क जमाकर समय एवं दिन निश्चित कर लिया जाता है। इसी शुल्क में पुरोहित की दक्षिणा भी सम्मिलित है। पूजा करानेवाले को अपने साथ कुछ भी लाने की आवश्यकता नहीं है। पूजा के दिन यजमान की सदेह उपस्थिति अनिवार्य है। यदि यजमान स्वयं उपस्थित होने में असमर्थ हैं तो उनके निकटतम रक्त संबंधी (पति, पत्नी, माता, पिता, सोदर भाई, बहन आदि) आकर पूजा संपन्न कर सकते हैं।