Mahavir Mandir Patna

ऑनलाइन पूजा / अनुष्ठान / वैदिक अनुष्ठान की सूची

ऑफलाइन पूजा / अनुष्ठान / वैदिक अनुष्ठान की सूची

पूजा-अर्चना (पूजा-पाठ)

रुद्राभिषेक विवरण: रोग, मृत्युभय, बाधा, चिन्ता, कालसर्प योग, दुष्ट ग्रह आदि से छुटकारा पाने के लिए तथा पारिवारिक सुख शान्ति, समृद्धि, स्वास्थ्य आदि लाभ के लिए भगवान्‌ शिव का अभिषेक सबसे प्रसिद्ध कर्मकाण्ड माना जाता है। स्थापित शिवलिंग पर अभिषेक में शिववास का भी विचार नहीं होता है। शिव की पूजा के लिए शिववास का विचार उस स्थिति में किया जाता है, जब मिट्टी का शिवलिंग बनाकर पूजा करनी हो। किन्तु मन्दिर में स्थापित प्रस्तर शिवलिंग पर किसी भी दिन रुद्राभिषेक कराया जा सकता है। महावीर मन्दिर में भक्तों द्वारा जमा किए गये शुल्क से ३ लीटर दूध एवं भोग की विशेष व्यवस्था की जाती है। पूजन की अन्य सामग्री तथा पुरोहित की दक्षिणा भी इसी में सम्मिलित है। यजमान को कुछ भी लाने की आवश्यकता नहीं है।
रुद्राभिषेक विवरण: रोग, मृत्युभय, बाधा, चिन्ता, कालसर्प योग, दुष्ट ग्रह आदि से छुटकारा पाने के लिए तथा पारिवारिक सुख शान्ति, समृद्धि, स्वास्थ्य आदि लाभ के लिए भगवान्‌ शिव का अभिषेक सबसे प्रसिद्ध कर्मकाण्ड माना जाता है। स्थापित शिवलिंग पर अभिषेक में शिववास का भी विचार नहीं होता है। शिव की पूजा के लिए शिववास का विचार उस स्थिति में किया जाता है, जब मिट्टी का शिवलिंग बनाकर पूजा करनी हो। किन्तु मन्दिर में स्थापित प्रस्तर शिवलिंग पर किसी भी दिन रुद्राभिषेक कराया जा सकता है। महावीर मन्दिर में भक्तों द्वारा जमा किए गये शुल्क से ३ लीटर दूध एवं भोग की विशेष व्यवस्था की जाती है। पूजन की अन्य सामग्री तथा पुरोहित की दक्षिणा भी इसी में सम्मिलित है। यजमान को कुछ भी लाने की आवश्यकता नहीं है।
सत्यनारायण पूजा विवरण: भगवान्‌ सत्यनारायण की कथा घर घर में होती रही है। महावीर मन्दिर में इस पूजा के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है। इसमें लगभग २ घंटा समय लगता है। यहाँ भविष्य-पुराण में उपलब्ध सत्यनारायण की विशिष्ट पूजा की व्यवस्था की गयी है। (विशेष अध्ययन)
रामार्चा पूजा विवरण: भगवान्‌ श्रीराम एवं जगज्जननी की उपासना महावीर मन्दिर में जगद्‌गुरु रामानन्दाचार्य की लिखी हुई पद्धति से करायी जाती है। इसमें मन्दिर की ओर से नैवेद्यम्‌ प्रसाद की व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त प्रसाद यजमान स्वयं ला सकते हैं।
हनुमत-पूजा विवरण: खोयी हुई वस्तु पाने के लिए, शत्रु के प्रकोप से बचने के लिए, मंगल एवं शनि ग्रह की शान्ति के लिए, कलह से मुक्ति, सुख-शान्ति एवं समृद्धि के लिए महावीर हनुमान्‌ की उपासना सदियों से की जाती रही है। यह पूजा लगभग ३ घंटे तक चलती है। पूजन के अन्त में हवन भी होता है।
ग्रहशान्ति पूजा विवरण: पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए नवग्रह शांति और ग्रह शांति की पूजा की बहुत ही सुव्यवस्थित व्यवस्था है। मंदिर परिसर में नवग्रहों की विशेष शांति और निवारण के लिए एक भव्य 'नवग्रह मंडप' का उद्घाटन किया गया है, जहाँ भक्त पूरी प्रामाणिकता के साथ अनुष्ठान करवा सकते हैं। विशेष वेदी: मंदिर परिसर के नवग्रह मंडप के बीचों-बीच एक विशेष नवग्रह वेदी स्थापित है, जिसमें सभी नौ ग्रहों की मूर्तियां वैदिक नियमों के अनुसार विराजमान हैं। पूजा का समय: इस अनुष्ठान और विशेष दुष्ट ग्रह (एक ग्रह) शान्ति पूजा में सामान्यतः लगभग 1 घंटे और नवग्रह-शान्ति (नावों ग्रह की) पूजा में सामान्यतः लगभग 3 से 4 घंटे का समय लगता है। जन्म-कुण्डली या हस्तरेखा देखने पर ज्योतिषी यह निर्धारित करते हैं कि किस व्यक्ति को किस ग्रह का मन्त्र कितनी संख्या में जप कराना चाहिए। इस जप के लिए भी मन्दिर में महामृत्युंजय जप की तरह व्यवस्था है। नोट - ग्रहों के तान्त्रिक मन्त्र के जप के लिए यहाँ कोई व्यवस्था नहीं है।
नवग्रहशान्ति पूजा विवरण: पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए नवग्रह शांति और ग्रह शांति की पूजा की बहुत ही सुव्यवस्थित व्यवस्था है। मंदिर परिसर में नवग्रहों की विशेष शांति और निवारण के लिए एक भव्य 'नवग्रह मंडप' का उद्घाटन किया गया है, जहाँ भक्त पूरी प्रामाणिकता के साथ अनुष्ठान करवा सकते हैं। विशेष वेदी: मंदिर परिसर के नवग्रह मंडप के बीचों-बीच एक विशेष नवग्रह वेदी स्थापित है, जिसमें सभी नौ ग्रहों की मूर्तियां वैदिक नियमों के अनुसार विराजमान हैं। पूजा का समय: इस अनुष्ठान और विशेष दुष्ट ग्रह (एक ग्रह) शान्ति पूजा में सामान्यतः लगभग 1 घंटे और नवग्रह-शान्ति (नावों ग्रह की) पूजा में सामान्यतः लगभग 3 से 4 घंटे का समय लगता है। जन्म-कुण्डली या हस्तरेखा देखने पर ज्योतिषी यह निर्धारित करते हैं कि किस व्यक्ति को किस ग्रह का मन्त्र कितनी संख्या में जप कराना चाहिए। इस जप के लिए भी मन्दिर में महामृत्युंजय जप की तरह व्यवस्था है। नोट - ग्रहों के तान्त्रिक मन्त्र के जप के लिए यहाँ कोई व्यवस्था नहीं है।
हनुमानचालीसा पाठ विवरण: 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से अनेक लाभ होते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और भक्त के सभी बिगड़े काम बनते हैं। 108 बार पाठ करने से आध्यात्मिक बल, आत्मिक बल और मनोबल बढ़ता है, साथ ही पवित्रता की भावना महसूस होती है। 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, तनाव और असुरक्षा की भावना दूर होती है और व्यक्ति खुद को निरोगी महसूस करता है।
रामरक्षास्तोत्र/हनुमत कवच/आदित्य ह्रदय पाठ/अन्य पाठ विवरण:
रामरक्षास्तोत्र:
यह भगवान राम की स्तुति है और इसे पढ़ने से सभी प्रकार के भय, दुःख और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
हनुमत_कवच: यह हनुमान जी की स्तुति है और इसे पढ़ने से बल, बुद्धि, और शक्ति प्राप्त होती है।
आदित्य_हृदय_पाठ: यह सूर्य देव की स्तुति है और इसे पढ़ने से स्वास्थ्य, धन, और सफलता प्राप्त होती है।
सुन्दरकाण्ड पाठ / वाल्मीकि सुन्दरकाण्ड विवरण:
रामचरितमानस : खोये हुए व्यक्ति या किसी वस्तु को पुनः पाने के लिए सुन्दरकाण्ड का पाठ होता रहा है। इससे हनुमानजी की आराधना की जाती है।
वाल्मीकि-रामायण : वाल्मीकि रामायण के सुन्दरकाण्ड में ६८ अध्याय हैं। इसके पाठ का कई प्रकार से पुरश्चरण होता है। महावीर मन्दिर में तीन दिन एवं सात दिन के दो प्रकार से पाठ होता है। इसमें हवन नहीं होता है।
सुचना: वैदिक-कर्मकाण्ड : वैदिक कर्मकाण्डों के लिए पहले से शुल्क जमाकर समय एवं दिन निश्चित कर लिया जाता है। इसी शुल्क में पुरोहित की दक्षिणा भी सम्मिलित है। पूजा करानेवाले को अपने साथ कुछ भी लाने की आवश्यकता नहीं है। पूजा के दिन यजमान की सदेह उपस्थिति अनिवार्य है। यदि यजमान स्वयं उपस्थित होने में असमर्थ हैं तो उनके निकटतम रक्त संबंधी (पति, पत्नी, माता, पिता, सोदर भाई, बहन आदि) आकर पूजा संपन्न कर सकते हैं।

जप एवं पाठ (पूजा-पाठ)

दुर्गासप्तशती पाठ (सम्पुट / साधारण) विवरण:
सम्पुट पाठ : श्रीदुर्गासप्तशती में सात सौ मन्त्र हैं। इनमें से कुछ मन्त्र सम्पुट पाठ के लिए प्रसिद्ध हैं। विभिन्न कामनाओं की सिद्धि के लिए विभिन्न बीज मन्त्रों का विधान किया गया है। सम्पुट पाठ में १३ अध्याय के सात सौ मन्त्रों में प्रत्येक मन्त्र के आगे-पीछे बीजमन्त्र जोड़कर पाठ किया जाता है। इस प्रकार एक सामान्य पाठ से तीन गुना समय इस सम्पुट पाठ में लगता है। यह पाठ विशेष फलदायी माना गया है। (विशेष अध्ययन)

साधारण पाठ : देवी की उपासना में यह पाठ सबसे प्रसिद्ध है। इस पाठ के अन्तर्गत अर्गला, कील, कवच, शापोद्धार, शतनाम, मूल १३ अध्याय एवं अन्त में ऋग्वेद के देवी-सूक्त का पाठ होता है। इसमें लगभग ढाई घंटा का समय लगता है। (विशेष अध्ययन)
कलशस्थापन - दुर्गा पाठ सहित (नौ दिन) विवरण: कलश स्थापना, जिसे घटस्थापना भी कहा जाता है, नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नौ दिनों की अवधि के दौरान देवी के नौ रूपों की पूजा करने और उनका आशीर्वाद लेने का एक अनुष्ठान है।
मनोकामना यज्ञ विवरण: मनोकामना यज्ञ, जिसे "कामना पूर्ति यज्ञ" या "इच्छा पूर्ति यज्ञ" भी कहा जाता है, एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें देवी-देवताओं को प्रसन्न करके अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए यज्ञ किया जाता है। यह यज्ञ विशेष रूप से तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति किसी विशेष मनोकामना को पूरा करना चाहता है, जैसे कि स्वास्थ्य, धन, विवाह, या शिक्षा में सफलता।
जन्ममंगलानुष्ठान विवरण: जन्मदिन के अवसर पर आयु-वृद्धि तथा अगले वर्ष में सुख, शान्ति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि के लिए देवताओं की पूजा तथा हवन का विधान शास्त्रों में किया गया है। महावीर मन्दिर की ओर से इसकी व्यवस्था की गयी है। इसे वर्षवृद्धि या वर्द्धापन भी कहा जाता है।
ध्वज संकल्प विवरण: पटना के महावीर मंदिर में हनुमान जी के चरणों में श्रद्धा प्रकट करने और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए 'ध्वज संकल्प' (Dhwaja Sankalpa) और 'ध्वज पूजा' की बहुत ही उत्तम और व्यवस्थित व्यवस्था है। सनातन परंपरा में मंदिर के शिखर पर ध्वज लगाना या ध्वज का संकल्प लेना पूरे परिवार की सुख-समृद्धि, आयु-वृद्धि और विजय का प्रतीक माना जाता है। इस पूजा के तहत भक्त भगवान महावीर (हनुमान जी) के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा और समर्पण के प्रतीक के रूप में ध्वज अर्पित करने का संकल्प लेते हैं। मंदिर के पुरोहित आपके नाम और गोत्र का उच्चारण कर वैदिक रीति से संकल्प करवाते हैं।
मुण्डन विवरण: भक्तों की मन्नतें रहती है कि वे मन्दिर में बच्चे का मुण्डन-संस्कार कराये। महावीर मन्दिर में भी निर्धारित शुल्क जमा कर तुलसी-मण्डप के पीछे बच्चे का मुण्डन करा सकते हैं। इसके लिए नाई, पुरोहित आदि की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। बाजा बजाने से अन्य श्रद्धालुओं को असुविधा होती है, अतः इस पर रोक लगा दिया गया है।
रामावत सम्प्रदाय में दीक्षा विवरण: महावीर मन्दिर की ओर से रामावत संगत की स्थापना की जा रही है। रामावत संगत युग-प्रर्वतक सन्त रामानन्दाचार्य के सिद्धान्तों का अनुसरण सामान्यतः करेगी। रामानन्दाचार्य द्वारा स्थापित सम्प्रदाय का नाम है रामावत सम्प्रदाय और इस समुदाय के भक्त दो प्रकार के हैं- साधु एवं गृहस्थ। साधु बैरागी कहलाते हैं और आज भारत में ऐसे विरक्त सन्तों की संख्या सर्वाधिक होगी। उनके अपने नियम एवं अनुशासन हैं। रामावत संगत उनके प्रति अगाध श्रद्धा रखेगी तथा उनके नियम एवं अनुशासन में हस्तक्षेप नहीं करेगी। (विशेष अध्ययन)
महामृत्युंजय जप/अन्य ग्रह जप विवरण: : महामृत्युंजय जप : रोग, विघ्न-बाधा, मृत्यु की आशंका आदि के लिए मृत्यु को भी जीतने वाले महामन्त्र का जप प्राचीन काल से होता रहा है। वैदिक महामृत्युंजय मन्त्र इस प्रकार है-
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्‌।
ऊर्व्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्‌॥

यही मूल मन्त्र है। इस मन्त्र का १ लाख २५ हजार जप करने या कराने का विधान है। महावीर मन्दिर में योग्य साधक एवं पण्डित द्वारा यह जप कराने की व्यवस्था की गयी है। इसमें शुल्क जमा करने पर संकल्प लेने की तिथि निर्धारित की जाती है तथा उस दिन यजमान को स्वयं या अन्य किसी निकटतम व्यक्ति आकर संकल्प करते हैं और उसी दिन से जप आरम्भ हो जाता है। प्रत्येक १०,००० जप सम्पन्न होने पर उसका दशांश, १,००० मन्त्र से हवन होता है। इस हवन में यजमान अथवा किसी प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य है। शुल्क जमा करने की न्यूनतम ईकाई 3630.00 रुपया है जिसमें १०,००० जप एवं १,००० हवन, कुल ११,००० जप-संख्या सम्मिलित है।

सुचना: वैदिक-कर्मकाण्ड : वैदिक कर्मकाण्डों के लिए पहले से शुल्क जमाकर समय एवं दिन निश्चित कर लिया जाता है। इसी शुल्क में पुरोहित की दक्षिणा भी सम्मिलित है। पूजा करानेवाले को अपने साथ कुछ भी लाने की आवश्यकता नहीं है। पूजा के दिन यजमान की सदेह उपस्थिति अनिवार्य है। यदि यजमान स्वयं उपस्थित होने में असमर्थ हैं तो उनके निकटतम रक्त संबंधी (पति, पत्नी, माता, पिता, सोदर भाई, बहन आदि) आकर पूजा संपन्न कर सकते हैं।

वाहन-पूजा

वाहन-पूजा विवरण: नई खरीदी गयी गाड़ियों के लिए तथा विश्वकर्मा-पूजा (१७ सितम्बर) के दिन पुरानी गाडियों के लिए भी वाहन-पूजा की व्यवस्था है। इसमें फूल-माला एवं प्रसाद खरीदकर यजमान स्वयं हनुमानजी का भोग लगाते हैं तथा मन्दिर की ओर से निर्धारित पुजारी वाहन-पूजा कर सुन्दर भविष्य की शुभकामना करते हैं।
वाहन-पूजा विवरण: नई खरीदी गयी गाड़ियों के लिए तथा विश्वकर्मा-पूजा (१७ सितम्बर) के दिन पुरानी गाडियों के लिए भी वाहन-पूजा की व्यवस्था है। इसमें फूल-माला एवं प्रसाद खरीदकर यजमान स्वयं हनुमानजी का भोग लगाते हैं तथा मन्दिर की ओर से निर्धारित पुजारी वाहन-पूजा कर सुन्दर भविष्य की शुभकामना करते हैं।
वाहन-पूजा विवरण: नई खरीदी गयी गाड़ियों के लिए तथा विश्वकर्मा-पूजा (१७ सितम्बर) के दिन पुरानी गाडियों के लिए भी वाहन-पूजा की व्यवस्था है। इसमें फूल-माला एवं प्रसाद खरीदकर यजमान स्वयं हनुमानजी का भोग लगाते हैं तथा मन्दिर की ओर से निर्धारित पुजारी वाहन-पूजा कर सुन्दर भविष्य की शुभकामना करते हैं।

कुण्डली निर्माण / ज्योतिष परामर्श

कुण्डली मिलान (वर-वधू) विवरण: कुंडली मिलान एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो विवाह से पहले वर और वधू के बीच अनुकूलता का आकलन करने में मदद करती है। यह एक सुखी और सफल वैवाहिक जीवन के लिए आवश्यक माना जाता है.
कुण्डली निर्माण (भविष्यवाणी के साथ) विवरण: 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों के लिए कुंडली निर्माण और भविष्यवाणी, ज्योतिषीय विश्लेषण का एक हिस्सा है। इसमें जन्म तिथि, समय और स्थान के आधार पर ग्रहों की स्थिति का अध्ययन करके व्यक्ति के भविष्य के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए, कुंडली का उपयोग उनके स्वभाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, और संभावित चुनौतियों को समझने में मदद करता है। / जन्म कुंडली (Janam Kundli) एक ज्योतिषीय चार्ट है जो किसी व्यक्ति के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति को दर्शाता है, और इसका उपयोग भविष्यवाणियां करने के लिए किया जाता है। जन्म कुंडली के माध्यम से, व्यक्ति अपने स्वभाव, करियर, आर्थिक स्थिति, और वैवाहिक जीवन के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है। जन्म कुंडली बनाने के लिए, जन्म तिथि, जन्म समय, और जन्म स्थान की आवश्यकता होती है।
ज्योतिष परामर्श (हस्तरेखा/जन्म-कुण्डली) परीक्षण विवरण: ज्योतिष परामर्श में, हस्तरेखा और जन्म कुंडली दो अलग-अलग तरीके हैं, जो व्यक्ति के भविष्य और व्यक्तित्व के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। हस्तरेखा शास्त्र में, हाथों की रेखाओं का अध्ययन किया जाता है, जबकि जन्म कुंडली में, जन्म के समय ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण किया जाता है। दोनों ही विधियाँ ज्योतिष का हिस्सा हैं और व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाल सकती हैं।

महावीर मन्दिर में अनुष्ठान की प्रक्रिया

यह एक ऐसा मन्दिर है जहाँ भक्त निश्चित शुल्क के भुगतान पर अनुष्ठान पूरा करने के लिए सभी सामग्री प्राप्त करते हैं और पुरोहितों को 'दक्षिणा' का भुगतान मन्दिर प्रबंधन द्वारा किया जाता है।