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9. पालगंज का जगन्नाथ मन्दिर- श्री रामकिंकर उपाध्याय
पुरी धाम में अवस्थित भगवान् जगन्नाथ का मन्दिर एक मन्दिर ही नहीं, बल्कि एक सम्प्रदाय के रूप में उभर कर दिखाई देता है। यही ... -
8. दारु ब्रह्म- श्री महेश प्रसाद पाठक
भगवान् जगन्नाथ का विग्रह काष्ठ का है। ब्रह्मपुराण की कथा के अनुसार स्वयं भगवान् विष्णु ने तपस्यारत राजा इन्द्रद्युम्न को आदेश दिया था ... -
6.भगवान् जगन्नाथ के तीनों रथों के अंगों के नाम- डा. ममता मिश्र ‘दाशʼ
यहाँ भगवान् जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा के तीनों रथों के अंग-प्रत्यंगों के प्रामाणिक नाम दिये गये हैं। -
5.श्रीजगन्नाथ और भक्तकवि सालबेग- डा. ममता मिश्र ‘दाशʼ
भगवान् जगन्नाथ असंख्य जनसमुदाय की आस्था के केन्द्र रहे हैं। न केवल हिन्दू बल्कि मुसलमानों ने भी इनके प्रति अपनी भक्ति-भावना प्रकट की है। ... -
4. जगन्नाथ-लीला का दार्शनिक विमर्श- डा. सुदर्शन श्रीनिवास शाण्डिल्य
यह सम्पूर्ण चराचर जगत् प्रभु की लीलाभूमि है। वे हम मर्त्यों को शिक्षा देने के लिए, साधुओं के त्राण के लिए तथा असाधुओं के ... -
3.पुराणों में जगन्नाथ तत्त्व- आचार्या कीर्ति शर्मा
यहाँ भगवान् जगन्नाथ की पौराणिक कथा का संक्षिप्त उल्लेख कर लेखिका ने इसके माहात्म्य का वर्णन किया है। इसकी प्रमुख कथा स्कन्द पुराण के ... -
2. भगवान् जगन्नाथ की अवधारणा का वैदिक-सूत्र- श्री अरुण कुमार उपाध्याय
भगवान् जगन्नाथ सनातन धर्मावलम्बियों के द्वारा पूजित हैं। इनकी पौराणिक कथा स्कन्द-पुराण के पुरुषोत्तम माहात्म्य में विस्तार से आयी है। लेकिन लेखक की मान्यता ... -
1. चतुर्भुज दास कृत जगज्जीवनचरितम् (पाण्डुलिपि से प्रथम बार सम्पादन)- भवनाथ झा
राजस्थान स्थित गलता की सन्त परम्परा में जगजीवन दास नामक किसी वैष्णव सन्त की गौरवगाथा संस्कृत के इस लघु काव्य में निबद्ध है। इसके ... -
Dharmayan Jagannath Ank download pdf
भगवान् जगन्नाथ मन्दिर, पुरी तथा अन्य जगन्नाथ मन्दिरों के सम्बन्ध में प्रामाणिक आलेखों से सुसज्जित पत्रिका। पं. भवनाथ झा के सम्पादन में महावीर मन्दिर ... -
Dharmayan vol. 108 Bhagawan Jagannath Ank
यहाँ भगवान् जगन्नाथ की पौराणिक कथा का संक्षिप्त उल्लेख कर लेखिका ने इसके माहात्म्य का वर्णन किया है। इसकी प्रमुख कथा स्कन्द पुराण के ...




















महावीर मन्दिर प्रकाशन
महावीर मन्दिर प्रकाशन
महावीर मन्दिर प्रकाशन
महावीर मन्दिर प्रकाशन
धर्मायण, अंक संख्या 114, परमहंस विष्णुपुरी विशेषांक