Latest Articles
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सन्त जानकी दास की कृति “रामजनम बधाई”- (पाण्डुलिपि से सम्पादन)-भवनाथ झा
यह पद संग्रह जानकी दास की कृति के रूप में पाण्डुलिपि में Indianmanuscript.com पर “रामजन्म बधाई” के नाम से उपलब्ध हुआ है। इसमें कुल ... -
Dharmayan vol. 105 Ramanavami Ank
सनातन परम्परा में चैत्र का मास महत्त्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से भारतीय नववर्ष का आरम्भ ... -
प्रॉफे. डॉ. वसन्तकुमार मनुभाई भट्ट
प्रोफे. वसन्तकुमार एम. भट्ट देश के गिने-माने संस्कृत विद्वानों में एक हैं। इनके आलेख धर्माय़ण पत्रिका में भी प्रकाशित हैं। ऐसे मनीषी के अध्यापक, ... -
महाशिवरात्रि महत्व एवं शिव महिमा
लेखक- श्री जगन्नाथ करंजे लिङ्गायत शैव आगम एवं दर्शन के विद्वान्, बीदर, कर्णाटक जो प्रभु शिव की महिमा वेद , अगम और पुराण को ... -
शोधपरक लेखों में संदर्भ (Reference) देने की पद्धति
आलेख के लिए आवश्यक है कि मूल आलेख में Superscript में संख्या देकर Footnote नियमानुसार लिखा जाना चहिए। सन्दर्भ रहने पर ही आलेख विश्वसनीय ... -
प्रो. (डा.) जंग बहादुर पाण्डेय
राँची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डा. जे.बी. पाण्डेय धर्मायण पत्रिका के प्रतिष्ठित लेखक हैं। उनके लेखन के लिे आभा -
सन्त रविदास
धर्मायण, अंक संख्या 104, फाल्गुन मास, 2077 विक्रम संवत् प्रधान सम्पादक- आचार्य किशोर कुणाल सम्पादक- पं. भवनाथ झा धर्माय़ण का सन्त रविदास अंक का ... -
Dharmayan vol. 104 Sant Ravidas Ank
मध्यकाल में सासाजिक भेद-भाव दूर करने में अग्रणी सुधारक स्वामी रामानन्द के शिष्य सन्त रैदास वस्तुतः अपने गुरु आचार्य रामानन्द के द्वारा प्रवर्तित रामावत ... -
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Sarasvati in Vedic Mythology
अनेक इतिहासकारों ने लिखा है कि वैदिक साहित्य में सरस्वती का उल्लेख केवल नदी के रूप में है, ज्ञान की देवी के रूप में ...



























महावीर मन्दिर प्रकाशन
महावीर मन्दिर प्रकाशन
महावीर मन्दिर प्रकाशन
महावीर मन्दिर प्रकाशन
धर्मायण, अंक संख्या 114, परमहंस विष्णुपुरी विशेषांक