Dharmayan vol. 102 Khara-masa Ank

वर्तमान में कोविड-19 के कारण यह पत्रिका केवल ई-पत्रिका के रूप में प्रकाशित हो रही है।

नीचे पत्रिका लोड हो रही है। कृपया कुछ देर प्रतीक्षा करें………

अंक संख्या 102, खरमास-विशेषांक हिन्दी धार्मिक पत्रिका “धर्मायण”

पौष मास को आमलोग खर मास भी कहा करते हैं और उसे इतना तक अशुभ मानने लगे हैं कि किसी पूजा-पाठ से भी लोग कतराने लगें हैं। लेकिन सनातन धर्म में अन्य मासों की तरह यह भी महत्त्वपूर्ण है। केवल 4 कार्य- विवाह, उपनयन, मुंडन तथा घर बनाने का कार्य नहीं किया जाता है। हाल के दिनों में खर का अर्थ गदहा समझकर कुछ अश्लील कहानियाँ गढ़े जाने कारण लोग इससे डरने लगे हैं। लेकिन यदि हम अपने शास्त्रों का अवलोकन करें तो पता चलता है कि इस मास में भी अनेक व्रतों का विधान किया गया है। एकादशी, दशमी, अमावस्या, सप्तमी, अष्टमी आदि तिथियों में व्रतों के विधान किये गये हैं। आज आवश्यकता है कि हम खरमास नाम के कारण उन भ्रान्तियों को दूर करें तथा कुछ अज्ञानी ज्योतिषियों के द्वारा फैलायी गयी कहानियों पर ध्यान न दें।

इसी उद्देश्य से आचार्य किशोर कुणाल के प्रधान सम्पादकत्व एवं पं. भवनाथ झा के सम्पादन में प्रकाशित महावीर मन्दिर की पत्रिका “धर्मायण” का 102वाँ अंक खरमास विशेषांक के रूप में निकाला गया है। इसमें ज्योतिष, धर्मशास्त्र, पुराण आदि के आधार पर प्रामाणिक विवेचन करते हुए कुल 8 आलेख खरमास पर प्रस्तुत किये गये हैं।

आलेखों की विषयवस्तु

प्रख्यात आइ.पी.एस. पदाधिकारी एवं शिक्षा से चिकित्सक डा. परेश सक्सेना ने सनातन धर्म के पर्वों को स्वास्थ्य से जोड़ते हुए अपना मन्तव्य “खरमास- एक ऐतिहासिक और वैज्ञानिक विवेचन” शीर्षक आलेख में दिया है। साथ ही, इऩ्होंने आयुर्देव में वर्णित ऋतुचर्या को स्वास्थ्य तथा पर्व-त्योहारों से जोड़ते हुए उसे सायन पंचांग के आधार पर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

इन्डोलॉजी के मनोनीत फैलो डा. श्रीकृष्ण जुगनू ने खरमास को कृषिकार्य से जोड़ा है, तो दिल्ली के दर्शनशास्त्र के विद्वान् डॉ. लक्ष्मीकान्त विमल ने “ ‘कृत्यरत्नाकरʼ के आलोक में पौषमास” शीर्षक लेख में 14वीं शती के ग्रन्थ का हवाला देकर सनातन धर्म में पौष मास के कृत्यों पर विवेचन किया है।

पटना के डॉ. सुदर्शन श्रीनिवास शाण्डिल्य ने पौष मास को पोषक मास माना है।

पेशा से अवकाशप्राप्त अभियंता एवं ज्योतिष शास्त्र के विद्वान् डॉ. रामाधार शर्मा ने ज्योतिष शास्त्र के आधार पर खरमास का खगोलशास्त्रीय अध्ययन प्रस्तुत किया है, ताकि, लोग इस खगोलीय स्थितियों और उसके कारण कुछ कार्यों की वर्जना को समझ सकें।

इसके साथ ही, ‘तिलदाही व्रत’, ‘कूर्मद्वादशी पूजा’, तथा पौष मास की एकादशी का माहात्म्य भी इस अंक में हिन्दी अर्थ के साथ दिया गया है।

वरिष्ठ पत्रकार कुमुद सिंह ने ‘पुसैठ’ पर्व पर लिखा है, जिससे हमें मिथिला की संस्कृति और परम्परा का बोध होता है।

अन्य शोध-सामग्री

खरमास के विवेचन के साथ इस अंक में पटना के अवकाशप्राप्त भारतीय प्रशासनिक पदाधिकारी श्री राधा किशोर झा ने गृहस्थ धर्म पर लिखा है। दिल्ली के लेखक श्री अम्बिकेश कुमार मिश्र ने भारत से बाहर विष्णु की उपासना पर शोध आलेख प्रस्तुत किया है। कुल मिलाकर यह पूरा शोध-अंक खरमास के सम्बन्ध में लोगों की भ्रान्ति दूर करने के लिए पर्याप्त है।

आलेखों की प्रामाणिकता के लिए सन्दर्भ दिये गये हैं। हमें विश्वास है कि ये सभी आलेख अग्रतर शोधार्थियों के लिए तथा ज्ञान के पिपासु पाठकों के लिए उपयोगी होंगे।

  • (Title Code- BIHHIN00719),
  • धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना की पत्रिका,
  • मूल्य : पन्द्रह रुपये
  • प्रधान सम्पादक  आचार्य किशोर कुणाल
  • सम्पादक भवनाथ झा
  • पत्राचार : महावीर मन्दिर, पटना रेलवे जंक्शन के सामने पटना- 800001, बिहार
  • फोन: 0612-2223798
  • मोबाइल: 9334468400
  • E-mail: dharmayanhindi@gmail.com
  • Web: www.mahavirmandirpatna.org/dharmayan/
  • पत्रिका में प्रकाशित विचार लेखक के हैं। इनसे सम्पादक की सहमति आवश्यक नहीं है। हम प्रबुद्ध रचनाकारों की अप्रकाशित, मौलिक एवं शोधपरक रचनाओं का स्वागत करते हैं। रचनाकारों से निवेदन है कि सन्दर्भ-संकेत अवश्य दें।

निःशुल्क डाउनलोड करें। स्वयं पढें तथा दूसरे को भी पढायें। वर्तमान में कोविड-19 की महामारी में केवल ऑनलाइन पत्रिका निकल रही है। स्थिति सामान्य होने पर प्रकाशित करने की योजना बनायी जायेगी। ईमेल से प्राप्त करने हेतु महावीर मन्दिर, पटना को लिखें- Email: dharmayanhindi@gmail.com

आलेख-सूची, धर्मायण, खरमास विशेषांक, पौष, वि.सं. 2077, दिनांक 31 दिसम्बर, 2020 से  29 जनवरी 2021 तक

आलेखों को अलग अलग पढने के लिए शीर्षक पर क्लिंक करें>>>

  1. आलेखानुक्रम एवं प्रतिक्रिया
  2. सम्पादकीय भवनाथ झा
  3. खरमास- एक ऐतिहासिक और वैज्ञानिक विवेचन – डॉ. परेश सक्सेना
  4. पौष : फसल के लिए पुष्ययात्रा का अवसर और वर्षफल का दर्शक – डॉ. श्रीकृष्ण “जुगनू”
  5. पौष मास की पुष्यता डॉ. सुदर्शन श्रीनिवास शाण्डिल्य
  6. ‘कृत्यरत्नाकरʼ के आलोक में पौषमास – डॉ. लक्ष्मीकान्त विमल
  7. खरमास : एक सिंहावलोकन डॉ. रामाधार शर्मा
  8. पौष में सौभाग्य के लिए ‘तिलदाहीʼ व्रत का विधान संकलित
  9. पौष मास की विशेष पूजा- कूर्मद्वादशी -संकलित
  10. पौष मास का एक लोक-विधान ‘पुसैठʼ -कुमुद सिं‍ह
  11. पौष मास की एकादशी का माहात्म्यसंकलित
  12. विष्णु : व्यापक वैश्विक स्वरूप श्री अम्बिकेश कुमार मिश्र
  13. सनातन धर्म में गृहस्थ आश्रम एवं पति-पत्नी के आदर्श -श्री राधा किशोर  झा
  14. अध्यात्म-रामायण से रामकथा –आचार्य सीताराम चतुर्वेदी
  15. विद्या और विवेक में अन्तर डॉ. राजनीति झा
  16. पुस्तक समीक्षा- डा. रामविलास चौधरी कृत जलन्धरवधमहाकाव्यम्
  17. महावीर मन्दिर समाचार,
  18. मातृभूमि-वन्दना,
  19. पौष मास के व्रत-पर्व,
  20. रामावत संगत से जुड़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *