Title Code- BIHHIN00719, पंजीयन संख्य़ा- 52257/90

धर्मायण

धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना की हिन्दी मासिक पत्रिका

Dharmayan vol. 98 Krishna-bhakti Ank

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  •  (Title Code- BIHHIN00719),
  • धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना की पत्रिका,
  • मूल्य : बीस रुपये
  • प्रधान सम्पादक आचार्य किशोर कुणाल
  • सम्पादक भवनाथ झा
  • पत्राचार : महावीर मन्दिर, पटना रेलवे जंक्शन के सामने पटना- 800001, बिहार
  • फोन: 0612-2223798
  • मोबाइल: 9334468400,
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Dharmayan-vol-98-Krishna-Bhakti-Ank

आलेख सूची, अंक संख्या 98, श्रीकृष्ण-भक्ति विशेषांक

  1. रासेश्वर से योगेश्वर तक की व्यापकताभवनाथ झा
  2. पूर्णावतार भगवान् श्रीकृष्ण (भारतीय सांस्कृतिक आध्यात्मिकता) डा. धीरेन्द्र झा
  3. भाद्रपद में कृष्णावतरण का रहस्य डा. सुदर्शन श्रीनिवास शाण्डिल्य
  4. श्रीकृष्णस्तुतिः (संस्कृत स्तोत्र) श्री रामकिंकर उपाध्याय
  5. पूर्वोत्तर भारत की कृष्ण-भक्ति धारा में सामाजिक समरसता के सिद्धान्त आचार्य किशोर कुणाल
  6. श्रीकृष्ण की गोलोक-सहचारिणी राधा श्रीभागवतानन्द गुरु
  7. श्रीकृष्णजन्म की कथा पं. लल्लू लाल कृत प्रेमसागर (1774 ई.)से
  8. श्रीकृष्ण-क्रान्ति श्री गंगा पीताम्बर शर्मा श्यामहृदय
  9. व्रज-क्षेत्र की कृष्णाष्टमी डा. परेश सक्सेना
  10. कृष्णाष्टमी की एक विशिष्ट परम्परा श्री रामकिंकर उपाध्याय
  11. बिहार के लोकगीतों में श्रीकृष्ण-भक्तिधारा डा. काशीनाथ मिश्र
  12. शिवतत्त्व श्री अरुण कुमार उपाध्याय
  13. अध्यात्म-रामायण से राम-कथा – आचार्य सीताराम चतुर्वेदी की लेखनी से
  14. मातृभूमि वन्दना
  15. व्रतपर्व, भाद्रपद, 2077 वि.सं.
  16. रामावत संगत से जुड़िये
  17. महावीर मन्दिर में श्रीकृष्णाष्टमी का आयोजन

लेखकों से निवेदन

‘धर्मायण’ का अगला अंक वाल्मीकि-रामायण विशेषांक के रूप में प्रस्तावित है। आश्विन पूर्णिमा को महर्षि वाल्मीकि की जयन्ती मनायी जाती है। वाल्मीकि-रामायण सम्पूर्ण भारत में प्रचलित है, जिसके विभिन्न स्थानीय संस्करण हैं। सभी संस्करणों में कुछ न कुछ अंश परवर्ती कवियों के द्वारा जोड़े गये हैं। रामायण के विभिन्न संस्करणों के स्वरूप पर केन्द्रित यह अंक प्रस्तावित है। सन्दर्भ के साथ शोधपरक आलेखों का प्रकाशन किया जायेगा। अपना टंकित अथवा हस्तलिखित आलेख हमारे ईमेल mahavirmandir@gmail.com पर अथवा whats App.  सं. +91 9334468400 पर भेज सकते हैं। प्रकाशित आलेखों के लिए पत्रिका की ओर से पत्र-पुष्प की भी व्यवस्था है।

पाठकों से निवेदन

साथ ही, यह अंक आपको कैसा लगा, इसपर भी आपकी प्रतिक्रिया आमन्त्रित है, जिससे प्रेरणा लेकर हम पत्रिका को और उन्नत बना सकें। अपनी प्रतिक्रिया उपर्युक्त पते पर भेज सकते हैं। डाक से भेजने हेतु पता है- सम्पादक, धर्मायण, महावीर मन्दिर, पटना जंक्शन के निकट, पटना, 800001

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