मकर संक्रान्ति, 2021 ई.

मकर संक्रान्ति का पर्व दिनांक 14 जनवरी को होगा।

इस बार मकर संक्रान्ति दिनांक 14 जनवरी, 2021ई. को मनाया जायेगा।

इस दिन दोपहर के बाद 2:37 बजे सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस समय को संक्रमण काल कहते हैं। इसी संक्रमण काल के बाद से  पुण्यकाल मनाया जायेगा। शास्त्रानुसार इस पूरे दिन को पुण्याह कहा जाता है।

क्या है शास्त्र का नियम?

धर्मशास्त्र का नियम है कि मकर संक्रान्ति में सूर्यास्त के पहले संक्रमण हो रहा हो तो पूर्व दिन ही यानी जिस दिन संक्रमण हो रहा है, उसी दिन संक्रान्ति का पुण्यकाल होता है। मकर संक्रान्ति में संक्रमण काल से लेकर 20 घटी यानी 8 घंटा तक पुण्यकाल होता है।

इसबार विक्रम संवत् 2077 यानी 2012 ई. में पुण्यकाल में ही सूर्य के अस्त हो जाने  कारण संक्रमण काल 2.37 अपराह्ण से सूर्यास्त के समय तक पुण्यकाल माना जायेगा।

जिस दिन मकरसंक्रान्ति होती है, उस दिन प्रातःकाल में स्नान का मुहूर्त होता है। किन्तु दान का सबसे उत्तम मुहूर्त 2.37 के बाद होगा।

दान-पुण्य कैसे करें?

इस मकर संक्रान्ति में तिल, गुड़, चूड़ा, दही आदि का दान प्रशस्त माना गया है। लोग स्वयं भी इस वस्तुओं का उपयोग करें तथा दूसरे व्यक्ति को भी अर्पित करें। इस दिन पारम्परिक रूप से खिचड़ी खायी जाती है। यद्यपि इस बार बृहस्पति का दिन पड़ रहा है औऱ कहीं कहीं उस दिन खिचड़ी नहीं खाने की परम्परा है। लेकिन यहाँ हमें समझना चाहिए कि मकर-संक्रान्ति विशेष दिन है, यहाँ सामान्य दिनों के समान निषेध लागू नहीं होता है। इस प्रकार मकरसंक्रान्ति के अवसर पर बृहस्पतिवार होने पर भी खिचड़ी खाने में भी दोष नहीं है।

उत्तरायण सूर्य का महत्त्व

शास्त्र के अनसार इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं। ज्योतिष तथा पुराणों में मनुष्य के एक वर्ष को देवताओ का एक दिन माना गया है, जिसमें मकर, कुम्भ, मीन, मेष, वृष एवं मिथुन इन छह राशियो के सूर्य को उत्तरायण का सूर्य यानी देवताओं का दिन माना गया है, जो यज्ञ आदि के लिए प्रशस्त है। लेकिन इसके बाद कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक एवं धनु इन छह राशियों में सूर्य दक्षिणायऩ अर्थात् देवताओं की रात का समय माना गया हैं। दक्षिणायन में सूर्य के रहने पर  यज्ञ आदि नहीं होते हैं।

पुराणों के अनुसार मकर की संक्रान्ति के दिन से देवता के दिन का आरम्भ माना जाता है। अतः पूरे दिन में प्रातःकाल के जो आध्यात्मिक महत्त्व होता है, वहीं महत्त्व पूरे वर्ष भर में मकर संक्रान्ति के दिन का होता है।

इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को महावीर मन्दिर परिवार की शुभकामनाएँ।

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