मकर संक्रान्ति, 2021 ई.

2021 ई. में मकर संक्रान्ति कब होगी?

दिनांक 14 जनवरी, 2021 ई. को मकर संक्रान्ति है।

मकर संक्रान्ति को तिला संक्रान्ति भी कहते हैं।

मकर-संक्रांति के दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं। मकर से लेकर छह संक्रांति मकर, कुम्भ, मीन, मेष, वृष, मिथुन तक उत्तरायण सूर्य कहा जाता है। आगे कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु ये दक्षिणायन होते हैं।

लगभग एक महीने तक सूर्योदय एक राशि में होता है। इस प्रकार जिस राशि पर सूर्य का उदय होता है, उस राशि का सूर्य उतने महीने तक माना जाता है।

“धर्मायण” अंक संख्या 102
  • मकर संक्रान्ति, 2021 ई.
    इस दिन दोपहर के बाद 2:37 बजे सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस समय को संक्रमण काल कहते हैं।Continue Reading
  • ईश्वर की शरणागति
    शरणागति के इन सिद्धान्तों को भक्तिकाल के लगभग सभी कवियों ने स्वीकार किया है तथा अपने साहित्यों में स्थान देकर विस्तृत विवेचना भी की है । अतः शरणागति के प्रत्येक अंगों पर इनकी रचनाएँ, दोहे आदि देखे जा सकते हैं।Continue Reading
  • दशतारक किसे कहते हैं?
    प्राचीन काल में हमारा जन-जीवन वर्षा पर निर्भर करता था। आर्द्रा नक्षत्र से हस्त नक्षत्र तक वर्षा का समय होता है। इन महींनों में वर्षा होने से फसल उपजती है। डाक के वचन हमारे लिए प्रेरणा के स्रोत होते थे, जिसपर कृषि-विज्ञान आधारित था। डाक का वचन है कि –Continue Reading
  • Dharmayan vol. 88
    महावीर मन्दिर, पटना के द्वारा प्रकाशित धर्मायण पत्रिका की अंक संख्या 88Continue Reading
  • Dharmayan vol. 89
    पत्रिका का यह अंक प्रकाशित प्रति भी मन्दिर में उपलब्ध है, इसे मन्दिर काउण्टर से प्राप्त कर सकते हैं। पाण्डव गीता का प्रामाणिक सम्पादन इस अंक में डा. शशिनाथ झा के द्वारा सम्पादित पाण्डव-गीता का प्रकाशन किया गया है। डा. झा ने मिथिला की प्राचीन पाण्डुलिपि तथा अन्य प्रकाशित प्रतियोंContinue Reading

मकर संक्रान्ति के दिन से उत्तरायण सूर्य होते है। देवताओं के दिन का आरम्भ इसी दिन से माना जाता है। इस प्रकार, हर दिन जो महत्त्व प्रातःकाल का होता है, वही महत्त्व पूरे वर्ष में इस दिन का होता है।

मकर संक्रान्ति के दिन हमें प्रातः स्नान कर तिल, चावल, चूड़ा, दही, तिलकुट, भूरा, तिलबा आदि खाना चाहिए और दूसरे को भी खिलाना चाहिए। गृहस्थ-धर्म के अनुसार विना दूसरे को खिलाये इस दिन स्वयं नहीं खायें।

अतिथि-सत्कार गृहस्थों का परम धर्म है। यह मनुष्य-यज्ञ कहलाता है। इससे जो पुण्य मिलता है वह कभी नष्ट नहीं होता।

धर्मायण अंक संख्या 100

गृहस्थों का परम धर्म है- दान करना। बुद्धचरित में कहा गया है- जो अपने धन से जरूरतमंद लोगों सहायता नहीं करता, जो अपने बल से दूसरे की रक्षा नहीं करता उसके धन और बल व्यर्थ हैं।

मकर-संक्रान्ति सनातन धर्म का महान् पर्व है। इसे हम सभी साथ-साथ मनायें। हमें इस पर्व के बहाने सामाजिक भेद-भाव से ऊपर उठकर एक होना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *