Tag: लेखक
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शत्रुघ्नश्रीनिवासाचार्य पंडित शम्भुनाथ शास्त्री ‘वेदान्ती’
शत्रुघ्नश्रीनिवासाचार्य पंडित शंम्भुनाथ शास्त्री ‘वेदान्ती’ भगवद्भक्ति तथा भगवत्-तत्त्व-चिन्तन में लीन पण्डित शम्भुनाथ शास्त्री न केवल अपने प्रवचन से भगवान् की गाथाओं का प्रचार करते, बल्कि लेखन... -
श्री गिरिजानन्द सिंह
1. मैथिली कथा 'परंपरा', 'पूजाक पोथी', 'हमरा बिसरब जुनि' एवं Banaili, Roots to Raj हिंदी रूपांतर "बनैली मूल से राज तक" के लेखक श्री गिरिजानन्द सिंह इतिहास ... -
7. ऋषि-तत्त्व- श्री अरुण कुमार उपाध्याय
भारतीय परम्परा में ऋषियों का विवेचन व्यावहारिक तथा सैद्धान्तिक दोनों रूपों में हुआ है। अतः ऋषियों के अनेक प्रकार हो जाते हैं। विभिन्न दृष्टिकोण से विवेचना ... -
5. लोक शिक्षक– सप्तर्षि- श्री महेश प्रसाद पाठक
निरुक्तकार यास्क ने ऋषि की परिभाषा दी है- ऋषिः दर्शनात्। जिन्होंने हमारी ज्ञान परम्परा वेद, वेदाङ्ग, स्मृति आदि का दर्शन किया, वे ऋषि कहलाये। इन्होंने ... -
4. “महर्षयः सप्त पूर्वे”- डॉक्टर सुदर्शन श्रीनिवास शाण्डिल्य
श्रीमद्भगवद्गीता के 10वें अध्याय में भगवान् की विभूतियों के वर्णन-क्रम में सप्तर्षियों का विवेचन आया है- महर्षयः सप्त पूर्वे इत्यादि। यहाँ व्याख्याकारों ने अनेक प्रकार से ... -
3. ऋषि : कृषि और ज्ञान-विज्ञान के प्रवर्तक- डॉ. श्रीकृष्ण “जुगनू”
सप्तर्षि हमारी ज्ञान परम्परा के व्यावहारिक पक्ष के प्रवर्तक रहे हैं। उन्होंने न केवल हमारी दिनचर्या, तथा समाजचर्या पर उपदेश किया बल्कि कृषि-विज्ञान, पर भी प्रकाश ... -
2. ‘सप्तर्षिसम्मतस्मृति’ : एक अवलोकन- डॉ. ममता मिश्र दाश
बहुत सारे उदार विचार 19वीं शती से लेकर आजतक अप्रचारित रहे तो दूसरी ओर अपनी इच्छा से श्लोक बनाकर स्मृतियों के नाम पर बाँटे गये। दोनों ... -
Dr. Lalit Mohan Joshi
डॉ. ललित मोहन जोशी, विभागाध्यक्ष, वाणिज्य एवं प्रबन्ध संस्थान, एम.आइ.टी. ऋषिकेश (उत्तराखण्ड), उच्चशिक्षा- एम.कॉम., पी-एच.डी. (लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ), भारतीय ज्योतिष शास्त्र एवं भारत की उदात्त परम्परा ... -
Ravi Sangam
लेखक रवि संगम स्वतंत्र पत्रकारिता के व्यवसाय से जुड़े रहे है। रचनात्मकता की प्रवृत्ति के कारण अपनी पत्रकारिता के दौरान उन्हें बिहार में पर्यटन के विकास ... -
Dr. Sudarshan Shrinivas Shandilya
डा. सुदर्शन श्रीनिवास शाण्डिल्य संस्कृत विद्या के पारम्परिक विद्वान् एवं अध्यापक हैं। गीता के ज्ञान का गम्भीर उपदेश देने के लिए इनकी ख्याति विशेष रूप से ...























महावीर मन्दिर प्रकाशन
महावीर मन्दिर प्रकाशन
महावीर मन्दिर प्रकाशन
महावीर मन्दिर प्रकाशन
धर्मायण, अंक संख्या 114, परमहंस विष्णुपुरी विशेषांक