Tag: Mahavir Mandir Patna
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लेखकों से निवेदन, शोधपरक आलेख आमन्त्रित, लेखकों को दी जाती है सम्मान-राशि।
‘धर्मायण’ के अगले अंक, (अंक संख्या 118, वैशाख, सं. 2079) के लिए प्रस्ताव की पृष्ठभूमि- “लोक-देवताओं के रूप में परशुराम, नरसिंह, कूर्म एवं बुद्ध की उपासना” -
श्री गिरिजानन्द सिंह
1. मैथिली कथा 'परंपरा', 'पूजाक पोथी', 'हमरा बिसरब जुनि' एवं Banaili, Roots to Raj हिंदी रूपांतर "बनैली मूल से राज तक" के लेखक श्री गिरिजानन्द सिंह इतिहास ... -
आलेख संख्या- 12. “कालिदासकृत रघुवंशकी रामायण-कथा- रामकथा” लेखक आचार्य सीताराम चतुर्वेदी भाग 2
देश के अप्रतिम विद्वान् आचार्य सीताराम चतुर्वेदी हमारे यहाँ अतिथिदेव के रूप में करीब ढाई वर्ष रहे और हमारे आग्रह पर उन्होंने समग्र वाल्मीकि रामायण का ... -
आलेख संख्या- 11. “जीमूतवाहन की आराधना का लोकपर्व जितिया” लेखक श्रीमती रंजू मिश्र
आश्विन मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को विद्याधरों के राजा जीमूतवाहन की उपासना की जाती है। ये जीमूतवाहन बोधिसत्त्व के रूप माने गये हैं, जिन्होंने ... -
आलेख संख्या- 10. “शरत्-पूर्णिमा- कोजागरा एवं कौमुदी महोत्सव” लेखक श्रीमती रंजू मिश्र
आश्विन मास की पूर्णिमा महत्त्वपूर्ण है। एक अन्य लेख में हम पढ़ चुके हैं कि इस रात्रि की चन्द्रिका अमृतमयी मानी गयी है, अतः मगध क्षेत्र ... -
आलेख संख्या- 9. “सामवेदीय कौथुमशाखा का परिचय” लेखक डा. सुन्दरनारायण झा
सामवेद भारतीय संगीत शास्त्र की परम्परा है, यह गान है जो विलुप्त होता जा रहा है। सम्पूर्ण उत्तर भारत में यदि लोग वेदाध्ययन करते भी हैं ... -
आलेख संख्या- 8. “‘श्रीमद्भगवद्गीता’ में प्रयुक्त कृष्ण के नाम पर्यायों का शैलीगत अध्ययन” लेखक डॉ. विजय विनीत
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान् कृष्ण के अनेक नाम आये हैं। इन नामों के यथास्थान प्रयोग का भी अपना विशिष्ट तात्पर्य है। -
आलेख संख्या- 7. “आरोग्य धाम-अश्विनी कुमार” लेखक श्री महेश प्रसाद पाठक
आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को अश्विनी नक्षत्र होता है। अश्विनी नक्षत्र में दो तारे होते हैं, वे अमृतमय माने गये हैं। इन्हें अश्विनीकुमारों की संज्ञा ... -
आलेख संख्या- 6. “गणपति अथर्वशीर्ष में गणेश-मन्त्रोद्धार विचार” लेखक- श्री अंकुर पंकजकुमार जोषी
भगवान् गणेश के मन्त्र को लेकर आज एक फैशन चल पड़ा है- गं गणपतये नमः। जबकि यह शास्त्र से प्रमाणित नहीं है। गणपति अथर्वशीर्ष में जो ... -
आलेख संख्या- 5. “कृष्ण-जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण के साथ दुर्गा की पूजा”- लेखक श्री गिरिजानन्द सिंह
कृष्णजन्म के ही काल में यशोदा के गर्भ से योगमाया भगवती का आविर्भाव हुआ था, जिसका संकेत दुर्गासप्तशती में भी है– नन्दगोपगृहे जाता यशोदागर्भसम्भवा। ततस्तौ नाशयिष्यामि ...





















महावीर मन्दिर प्रकाशन
महावीर मन्दिर प्रकाशन
महावीर मन्दिर प्रकाशन
महावीर मन्दिर प्रकाशन
धर्मायण, अंक संख्या 114, परमहंस विष्णुपुरी विशेषांक