Tag: Mahavir Mandir Patna
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आलेख संख्या- 4. “श्रीकृष्ण बाललीला अवस्था विमर्श” लेखक- शत्रुघ्नश्रीनिवासाचार्य पण्डित शम्भुनाथ शास्त्री ‘वेदान्ती’
आनन्दकन्द भगवान् श्रीकृष्ण की लीला यमुना के तट पर गोप-गोपियों के बीच हुई थी, जिसे लेकर अनेक भ्रान्तियाँ काव्यों, चित्रों तथा कथाओं के माध्यम से फैलाये ... -
आलेख संख्या- 3. “यत् पिण्डे तद् ब्रह्माण्डे” लेखक डा. ललित मोहन जोशी
आश्विन मास का सम्पूर्ण कृष्णपक्ष पितृपक्ष कहलाता है। इसमें विशेष रूप से अपने मृत पूर्वजों के प्रति तर्पण, पार्वण आदि के द्वारा श्रद्धाञ्जलि व्यक्त करते हैं। ... -
आलेख संख्या- 2. “ऋषियों के द्वारा निर्दिष्ट धर्म के स्रोत” लेखक श्री राधा किशोर झा
सनातन परम्परा में धर्म अच्छी तरह परिभाषित है। वैदिक साहित्य, महाभारत, रामायण, पौराणिक साहित्य सब में धर्म पर विशद चर्चा है और जब हम सबको एकत्र ... -
सम्पादकीय “आश्विन मास, इतिहास तथा पुराणों के सन्दर्भ में” पण्डित भवनाथ झा
दुर्गा-पूजा प्रमुख रूप से आश्विन मास में मनाया जाता है। आश्विन के नवरात्र को वार्षिक-पूजन कहा गया है। यह एक सहज प्रश्न है कि आश्विन मास ... -
धर्मायण अंक संख्या 111, आश्विन, 2078 का अंक free pdf magazine
यह अंक विषयों की विविधता से भरा हुआ है। इसमें भारत की शक्ति-उपासना, कृष्ण-उपासना, गणेश-उपासना, पितृ-उपासना, लक्ष्मी-उपासना तथा लोकदेवताओं की उपासना से सम्बन्धित प्रामाणिक सामग्री संकलित ... -
धर्मायण अंक संख्या 111, आश्विन, 2078 का अंक फ्लिपबुक
यह अंक विषयों की विविधता से भरा हुआ है। इसमें भारत की शक्ति-उपासना, कृष्ण-उपासना, गणेश-उपासना, पितृ-उपासना, लक्ष्मी-उपासना तथा लोकदेवताओं की उपासना से सम्बन्धित प्रामाणिक सामग्री संकलित ... -
धर्मायण के श्रावण 2079 वि.सं. के प्रस्तावित केन्द्रीय विषय
‘धर्मायणʼ का अगला श्रावण मास का अंक इस बार रक्षाबन्धन-विशेषांक के रूप में प्रस्तावित है। श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षाबन्धन का पर्व मनाया जाता है। वर्तमान ... -
Dharmayan vol. 102 Khara-masa Ank
इस मास में भी अनेक व्रतों का विधान किया गया है। एकादशी, दशमी, अमावस्या, सप्तमी, अष्टमी आदि तिथियों में व्रतों के विधान किये गये हैं। आज ... -
Dharmayan vol. 99 Valmiki Ramayana Ank
आज एक सामान्य अवधारणा बन गयी है कि वाल्मीकि-रामायण का मुंबई-संस्करण जो गीता प्रेस से प्रकाशित है, वहीं एक मात्र पाठ है। जबकि सच्चाई है कि ...























महावीर मन्दिर प्रकाशन
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धर्मायण, अंक संख्या 114, परमहंस विष्णुपुरी विशेषांक