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5. लोक शिक्षक– सप्तर्षि- श्री महेश प्रसाद पाठक
निरुक्तकार यास्क ने ऋषि की परिभाषा दी है- ऋषिः दर्शनात्। जिन्होंने हमारी ज्ञान परम्परा वेद, वेदाङ्ग, स्मृति आदि का दर्शन किया, वे ऋषि ... -
4. “महर्षयः सप्त पूर्वे”- डॉक्टर सुदर्शन श्रीनिवास शाण्डिल्य
श्रीमद्भगवद्गीता के 10वें अध्याय में भगवान् की विभूतियों के वर्णन-क्रम में सप्तर्षियों का विवेचन आया है- महर्षयः सप्त पूर्वे इत्यादि। यहाँ व्याख्याकारों ने अनेक ... -
3. ऋषि : कृषि और ज्ञान-विज्ञान के प्रवर्तक- डॉ. श्रीकृष्ण “जुगनू”
सप्तर्षि हमारी ज्ञान परम्परा के व्यावहारिक पक्ष के प्रवर्तक रहे हैं। उन्होंने न केवल हमारी दिनचर्या, तथा समाजचर्या पर उपदेश किया बल्कि कृषि-विज्ञान, पर ... -
2. ‘सप्तर्षिसम्मतस्मृति’ : एक अवलोकन- डॉ. ममता मिश्र दाश
बहुत सारे उदार विचार 19वीं शती से लेकर आजतक अप्रचारित रहे तो दूसरी ओर अपनी इच्छा से श्लोक बनाकर स्मृतियों के नाम पर बाँटे ... -
1. ऋषि, सप्तर्षि एवं उनके स्वरूप- डा. रामाधार शर्मा
जब हम तारों से भरे आकाश को रात में देखते हैं तो कुछ तारों का समूह हमें दिखाई पड़ता है। इस पूरे समूह का ... -
धर्मायण अंक संख्या 110, सप्तर्षि अंक
महावीर मन्दिर पटना के द्वारा प्रकाशित धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना की पत्रिका धर्मायण का सप्तर्षि विशेषांक। -
धर्मायण अंक संख्या 110, सप्तर्षि विशेषांक
महावीर मन्दिर पटना के द्वारा प्रकाशित धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना की पत्रिका धर्मायण का सप्तर्षि विशेषांक। अंक संख्या 110। भाद्र, 2078 विक्रम संवत्। -
कार्तिक, 2078 वि.सं. के अंक को प्रस्तावित विषय
धर्मायण का कार्तिक मास का विशेषांक महावीर हनुमान् पर केन्द्रित प्रस्तावित है। हनुमान-जयन्ती इसी कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को होती है। ... -
Dharmayan vol. 110 Saptarshi Ank
आज आवश्यकता है कि हम ऋषि-परम्परा तथा सप्तर्षि की परम्परा को व्यापक रूप में देखें। हम उस पुलह और काश्यप ऋषि को भी जानें, ... -
पं. जगदानन्द झा- यजुर्वेद, वाजसनेयि-माध्यन्दिन संहिता, अध्याय- 31-40
चतुर्वेद-मार्तण्ड, राष्ट्रपति-पुरस्कृत. जगदानन्द झा के स्वर में यजुर्वेद, वाजसनेयि-माध्यन्दिन संहिता, अध्याय- 31-40






















महावीर मन्दिर प्रकाशन
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धर्मायण, अंक संख्या 114, परमहंस विष्णुपुरी विशेषांक