शोध आलेख
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शिव में समाविष्ट शक्ति- श्री जगन्नाथ करंजे
शिव एवं शक्ति अर्थात् ब्रह्म एवं उनकी शक्ति के समन्वय की गाथा सम्पूर्ण भारत में आसेतु-हिमाचल समान है। अतः यदि काश्मीर के अद्वैत शैव ... -
वॆङ्कट कवि की कृति ‘सुन्दरेश्वरजाये- श्री रवि ओझा
वॆङ्कट कवि की कृति ‘सुन्दरेश्वरजाये- श्री रवि ओझा यह सनातन धर्म की चरम विशेषता है कि दक्षिण एवं उत्तर भारत की परम्परा एक-दूसरे के ... -
जनकभूमि की परिक्रमा- रवि संगम
जनकभूमि की परिक्रमा जगज्जननी जानकी के प्रति जन-सामान्य की आस्था को प्रकट करती है। यहाँ वर्तमान में प्रचलित जनकपुर परिक्रमा पथ का विवरण दिया ... -
अद्भुत-रामायण में मातृशक्ति सीताजी का अद्भुत स्वरुप- श्री महेश प्रसाद पाठक
अद्भुत-रामायण में मातृशक्ति सीताजी का अद्भुत स्वरुप- श्री महेश प्रसाद पाठक -
तन्त्रोपनिषदों में शक्ति की अवधारणा
108 उपनिषदों से अनेक उपनिषद्-ग्रन्थ वस्तुतः वैदिक परम्परा में न होकर आगम की परम्परा के अन्तर्गत आते हैं। इनमें तन्त्रागम के सिद्धान्त का वर्णन ... -
सूर्य सिद्धान्त का काल तथा शुद्धता (भाग-2)- श्री अरुण कुमार उपाध्याय
भारतीय काल-गणना का स्पष्ट प्रतिपादन होने के बाद भी यूरोपियन विद्वानों ने इसे एक शिरे से नकार दिया और सारी गणना जूलियन तथा ग्रेगोरियन ... -
सांस्कृतिक समन्वय के युगप्रतीक : श्रीराम – श्री महेश प्रसाद पाठक
मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम की कथा वाल्मीकि-रामायण सुदूर उत्तर से लेकर सुदूर दक्षिण पढा और क्षेत्रीय लिपियों में लिपिबद्ध किया गया है। यह इस बात का ... -
मैथिल महाकवि रूपनाथ उपाध्याय प्रणीत श्रीरामविजय महाकाव्य – डॉ. लक्ष्मीकान्त विमल
रामकथा तो वह भागीरथी है, जिसमें स्नान कर सभी लोग पवित्र होना चाहते हैं। इसी क्रम में मिथिला के महाकवि रूपनाथ उपाध्याय कृत श्रीरामविजय ... -
रामायण के प्रसिद्ध पात्र श्रवण कुमार के वास्तविक नाम की खोज : “यज्ञदत्तवध” – डॉ. काशीनाथ मिश्र
महान् मातृ-पितृभक्त श्रवण कुमार वाल्मीकि-रामायण के चर्चित पात्र हैं, लेकिन यह प्रश्न उठता रहा है कि श्रवण उनके पिता का नाम था ... -
श्रीरामनामलेखन की विधि- श्री अंकुर पंकजकुमार जोषी
कलियुग में रामनाम-लेखन एक विशिष्ट यज्ञ माना गया है। इसके लिए अनेक प्रकार की पुस्तिकाएँ प्रकाशित की गयी हैं। महावीर मन्दिर के परिसर ...




















महावीर मन्दिर प्रकाशन
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धर्मायण, अंक संख्या 114, परमहंस विष्णुपुरी विशेषांक